Saturday, 14 May 2016

बंटवारा नहीं होगा


दो भाई थे । अचानक एक दिन पिता चल बसे । भाइयों में बंटवारे की बात चली-''यह तू ले, वह मैं लूं, वह मैं लूंगा, यह तू ले ले ।'' आए दिन दोनों बैठे सूची बनाते, पर ऐसी सूची न बना सके, जो दोनों को ठीक लगे । जैसे-तैसे बंटवारे का

दो घड़े

एक घड़ा मिट्टी का बना था, दूसरा पीतल का। दोनों नदी के किनारे रखे थे। इसी समय नदी में बाढ़ आ गई, बहाव में दोनों घड़े बहते चले। बहुत समय मिट्टी के घड़े ने अपने को पीतलवाले से काफी फासले पर रखना चाहा।
पीतलवाले घड़े ने कहा, ''तुम डरो नहीं दोस्त, मैं तुम्हें धक्के न लगाऊँगा।''

चुन्नी मुन्नी


मुन्नी और चुन्नी में लाग-डाट रहती है । मुन्नी छह बर्ष की है, चुन्नी पाँच की । दोनों सगी बहनें हैं । जैसी धोती मुन्नी को आये, वैसी ही चुन्नी को । जैसा गहना मुन्नी को बने, वैसा ही चुन्नी को । मुन्नी '' में पढ़ती

पागल हाथी


मोती राजा साहब की खास सवारी का हाथी। यों तो वह बहुत सीधा और समझदार था, पर कभी-कभी उसका मिजाज गर्म हो जाता था और वह आपे में न रहता था। उस हालत में उसे किसी बात की सुधि न रहती थी, महावत का दबाव भी न मानता था। एक बार इसी पागलपन में उसने अपने महावत को मार डाला। राजा साहब ने वह खबर सुनी तो उन्हें बहुत क्रोध आया। मोती की पदवी छिन गयी। राजा साहब की सवारी से निकाल दिया गया। कुलियों की तरह उसे लकड़ियां ढोनी पड़तीं,

परीक्षा


जब रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजानसिंह बूढ़े हुए तो परमात्मा की याद आई। जा कर महाराज से विनय की कि दीनबंधु! दास ने श्रीमान् की सेवा चालीस साल तक की,  अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज संभालने की शक्ति नहीं रही। कहीं भूल-चूक हो जाए तो बुढ़ापे में दाग लगे।

जैसा सवाल वैसा जवाब


बादशाह अकबर अपने मंत्री बीरबल को बहुत पसंद करता था। बीरबल की बुद्धि के आगे बड़े-बड़ों की भी कुछ नहीं चल पाती थी। इसी कारण कुछ दरबारी बीरबल से जलते थे। वे बीरबल को मुसीबत में फँसाने के तरीके सोचते रहते थे।
अकबर के एक खास दरबारी ख्वाजा सरा को अपनी विद्या और बुद्धि पर बहुत अभिमान था। बीरबल को तो वे अपने

कौआ और लोमड़ी



क बार एक कौए को एक रोटी मिली। लोमड़ी ने सोचा क्यों न मैं इस कौए को मूर्ख बनाकर रोटी ले लूँ।

लोमड़ी बोली - कौए भाई तुम इतना अच्छा गाते हो! मुझे भी एक गाना सुनाओ।

कौए ने जैसे ही गाने के लिए मुँह खोला, रोटी नीचे गिर गई।

लोमड़ी रोटी लेकर चली गई।

अच्छे काम का पुरस्कार


एक बूढ़ा रास्ते से कठिनता से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े जोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े की टोपी हवा से उड़ गई। 
उसके पास होकर दो लड़के स्कूल जा रहे थे। उनसे बूढ़े ने कहा- मेरी टोपी उड़ गई है, उसे पकड़ो। नहीं तो मैं बिना टोपी

सच्चा मित्र – श्रीकृष्ण


संदीपनी नामक महात्मा के विद्यालय में अनेकों विद्यार्थी पढ़ा करते थे। उन्हीं में सुदामा और श्रीकृष्ण भी थे। हालांकि श्रीकृष्ण राज परिवार के बालक थे, और सुदामा किसी गरीब निर्धन ब्राह्मण के पुत्र थे परंतु फिर भी इन दोनों में परस्पर घना प्रेम थे। प्राचीन काल में

न्यायकारी राजा और किसान



ईरान देश का राजा बड़ा न्यायकारी, पवित्र आत्मा और प्रजा-पालक था जिसका शुभ नाम नौशेरवान था ।
एक समय वह सैर करने निकला तो एक बूढ़े किसान को जिसकी आयु 80 वर्ष की होगी , देखा । वह खेत में एक फलदार वृक्ष लगा रहा था । उसको देख राजा बोला-ऐ भले आदमी तुम्हारे पाँव तो कब्र

मूर्ख पण्डितों के नकली मन्त्र


चौधरी अमरसिंह, ग्राम रोहणा, जिला रोहतक, हरियाणा के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। आपने जीवनभर अध्यापन और आर्यसमाज की सेवा की। बाल्यकाल से ही इनमें गायत्री मन्त्र के सीखने की तीव्र जिज्ञासा थी। किसी ने इनको बताया कि गायत्री मन्त्र के जप से बुद्धि बढ़ती है और भूतों का भय भी नहीं रहता।

राजा और धूर्त अपराधी


प्राचीन काल में राजाओं के न्याय में अपराधी को हाथ, पैर, कान, नाक काटने व आँखें निकालने का दंड भी दिया जाता था। इसी प्रथा के अनुसार एक अपराधी को अपराध करने पर राजा ने उन्हें नाक कटवाने का दंड दिया। अपराधी की नाक काट दी गयी। अपराधी बड़ा ही धूर्त था। वह नाक के कटते ही कूद-कूद कर नाचने

भय का नाम ही भूत


एक लड़का भूत से डरा करता था। घर वालों ने डर छुटाने के लिए उसे एक साधू के पास भेजना प्रारम्भ किया; किन्तु लड़का जब साधु के पास जाता तो मार्ग में भी डरता हुआ जाता। एक दिन अंधेरी रात थी, लड़का जब साधुजी के पास पहुंचा तो पसीने से तर हो रहा था, सांस उखड़ रही थ। साधु ने पूछा – “क्यों क्या हाल

यह पत्थर की देवी मुझे कैसे बेटा देंगी ?


एक बहू पौराणिक महाशय के घर ब्याहकर गई तो पौराणिक महाशय के यहाँ प्रथा के अनुसार नई बहू को बेटे के साथ सास अन्य स्त्रियों सहित गाते-बजाते लेकर देवी के मंदिर पहुंची। देवी का मंदिर विचित्र बना हुआ था। मंदिर के आगे पत्थर की दो बिल्लियों की तस्वीरें अत्यंत ही खूबसूरत बनी हुई थी। उससे कुछ दूर पर पत्थर

संगठन का मूल्य


एक मूर्ख को कहीं से रेशम(silk) का थान मिल गया । उसने थान को बेचने की सोची । साथ ही यह भी तय कर लिया कि पूरे को एक साथ नहीं बेचना क्योंकि एक साथ ज्यादा पैसा जल्दी खर्च हो जाता है । थान को थोड़ा-थोड़ा

परिश्रमी किसान की बुद्धिमता


एक बार एक किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह बहुत ही परिश्रम से खेती करता था। उसके खेतों में पानी की सदैव कमी रहती थी अत: उसने अपने खेत में कुआं खोदने की ठानी। उसने खेत के एक कोने में बड़े परिश्रम से कुआं खोद दिया परंतु वहाँ पानी

परम्पराओं के जाल में



अंधविश्वास से सत्यानाश


किसी मजार पर एक फकीर रहते थे । सैकड़ों भक्त उस मजार पर आकार रुपए आदि चढ़ते थे । उन भक्तों में एक बंजारा भी था । बहुत निर्धन होने पर भी वह प्रतिदिन मजार पर माथा टेकता व फकीर की सेवा करता । उसका कपड़े का व्यवसाय था । कपड़ों